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डॉ॰ मुहम्मद मोती लाल
   

डॉ॰ मुहम्मद मोती लाल
(भूतपूर्व—‘डॉ॰ मोती लाल’)
(एम॰बी॰बी॰एस॰, एम॰एस॰)
जन्म 3 सितम्बर 1967, ज़िला बांदा, उ॰प्र॰

 

मैं बपचन से ही धार्मिक मानसिकता रखता था। राम-राम लिखा करता था। नव-दुर्गे में रामचरित्रामानस का पाठ दिया करता था। एम॰बी॰बी॰एस॰ के शुरुआती दौर में रामकृष्ण कथा में हर शनिवार को जाया करता था...वहाँ मौजूद संन्यासियों से भेंट भी करता था लेकिन उनके सामने कोई जीवन-उद्देश्य न होता था इसलिए कोई भी, संतुष्ट न कर सका। इसी बीच मैं ईसा-मसीह की शिक्षाओं से बहुत प्रभावित हुआ, लेकिन उस में मुझे कोई आदर्श नज़र न आया। (सच्चाई की) तलाश जारी रही। एक सहपाठी ने मुझे ‘इस्लाम धर्म’ नामक पुस्तक दी। फिर मैंने लगातार बहुत सारी पुस्तके पढ़ डालीं। फिर यह बात समझ में आ गई कि यही वह जीवन-व्यवस्था है जिसका अनुपालन हमें करना चाहिए, लेकिन मैंने यह बात किसी को बताई नहीं। ....एम॰बी॰बी॰एस॰ पूरी होने के बाद एक हिन्दू घराने में मेरी शादी हो गई। (5 सितम्बर 1993 को मेरा बायाँ पैर टूट गया 22 फ़रवरी 1994 को पैर में प्लास्टर की हालत में शादी हो गई थी)। 8-10 महीने तक मैं चारपाई पर पड़ा रहा। इसी बीच मेरी पत्नी ने भी सारी (इस्लामी) पुस्तके पढ़ डालीं और इस्लाम स्वीकार कर लिया।’’


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